बहेड़ा बहुत काम का फल है इसे हिन्दी में बहेड़ा, संस्कृत में विभीतक, अंग्रेजी में बेलेरिक मिरोबोलम (beleric myrobalan), मराठी में बहेड़ा, गुजराती में बहेड़ां, बंगाली में बहेड़े, कर्नाटकी में तारीकायी, मलयालम में तान्नि, तमिल में अक्कनडं और तेलगू में बल्ला कहते है। इसका रंग भूरा पीलापन लिए होता है। इसका स्वाद मीठा होता है। बहेड़ा का स्वभाव शीतल होता है, इसकी प्रकृति गर्म होती है। लेकिन दुर्भाग्य यह है की बहेड़ा फल के बीज के अन्दर जो मींगी होती है उसका औषधीय उपयोग होता है ,जो या तो बीज के साथ फेंक दी जाती है या कुछ कंपनियों द्वारा बीज के साथ ही पीस दी जाती है। नतीजा यह निकलता है की इससे बनी दवा काम नहीं करती है। जबकि यह बेहद पौष्टिक फल होता है।
बहेड़ा के फल में बेलैरीकैनिन ,फैटीक एसिड, फ्रक्टोज, रहामनोज, गैलेक्टोज, मैनीटाल, चैबुलेजिक एसिड, ग्लूकोज, गैलायल, एलैजिक एसिड, गेलिक एसिड, बीटासिटोस्तीराल आदि तत्व मौजूद है। इसके बीज मे प्रोटीन और आक्जेलिक एसिड की प्रचुर मात्रा होती है। बहेड़ा के सेवन की मात्रा 3 ग्राम से 6 ग्राम तक होनी चाहिए।
बहेड़ा कब्ज को दूर करने वाला होता है। यह मेदा (आमाशय) को शक्तिशाली बनाता है, भूख को बढ़ाता है, वायु रोगों को दस्तों की सहायता से दूर करता है, पित्त के दोषों को भी दूर करता है, सिर दर्द को दूर करता है, बवासीर को खत्म करता है, आंखों व दिमाग को स्वस्थ व शक्तिशाली बनाता है, यह कफ को खत्म करता है तथा बालों की सफेदी को मिटता है। बहेड़ा-कफ तथा पित्त को नाश करता है तथा बालों को सुन्दर बनाता है। यह स्वर भंग (गला बैठना) को ठीक करता है। यह नशा, खून की खराबी और पेट के कीड़ों को नष्ट करता है तथा क्षय रोग (टी.बी) तथा कुष्ठ (कोढ़, सफेद दाग) में भी बहुत लाभदायक होता है।
बहेड़ा (beleric myrobalan) के 45 चमत्कारी फायदे :
कब्ज : बहेड़े के आधे पके हुए फल को पीस लेते हैं। इसे रोजाना एक-एक चम्मच की मात्रा में थोड़े से पानी से लेने से पेट की कब्ज समाप्त हो जाती है और पेट साफ हो जाता है।
श्वास या दमा : बहेड़े और धतूरे के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीस लेते हैं इसे चिलम या हुक्के में भरकर पीने से सांस और दमा के रोग में आराम मिलता है।
बहेड़े को थोड़े से घी से चुपड़कर पुटपाक विधि से पकाते हैं। जब वह पक जाए तब मिट्टी आदि हटाकर बहेड़ा को निकाल लें और इसका वक्कल मुंह में रखकर चूसने से खांसी, जुकाम, स्वरभंग (गला बैठना) आदि रोगों में बहुत जल्द आराम मिलता है।
केवल बहेड़े का छिलका मुंह में रखने से भी सांस की खांसी दूर हो जाती है।
